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Saturday, November 6, 2021

Sad hindi poetry सैड हिंदी पोइट्री sad love poetry in hindi

 Sad hindi poetry

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कश्मकश में हु तुझसे सवाल क्या करूँ 

की कसमकस में हु तुझसे सवाल क्या करूँ तू था मेरी ही पसन्द
टूटा है दिल तो अब बवाल क्या करूं
नींदों को भी अब नींदों की  जरूरत आ पड़ी है
तूने की है ऐसी साजिशे भरी की मेरी जान
मेरी रूह एक दफा उसी रूह पर आ खड़ी है

जहां टुटा था दिल जहां टूटी थी आस
जहां उम्मीदों ने भी छोड़ दिया था मेरा साथ
बेबस बेचारी लाचार बनकर
सोचती रही कि कैसे छोड़ दिया तूने मेरा हाथ
 
फिर भी तेरे लौट आने की आस दिल मे बिठा रखी है
के अपनी उस मोहब्बत के मिशाल का क्या करूँ
तू था मेरी पसंद टूटा है दिल तो अब बवाल क्या करूँ

ना तमन्ना थी तेरे इश्क़ की
ना चाहत थी तेरे आशियानें की
हम तो तेरी दोस्ती में ही खुद को मुक्कमल समझते थे
नही चाहिए हमे मोहब्बत जमाने की

पर तु तो जिस्मानी मोहब्बत में इस कदर खो गया।।
तू जिसमें मोहब्बत में इस कदर खो गया मैं तेरा हूं तेरा ही रहूँगा मेरी जान
कहते कहते हर एक का हो गया
सब जानकर मेरी जान
की सब जानकर मेरी जान तेरी बेवफाई पर सवाल क्या करूँ
तू था मेरी पसंद टूटा है दिल तो अब बवाल क्या करूँ

इश्क के नाम पर जिस्म को पाना ।
इश्क के नाम पर जिस्म को पाना ही मोहब्बत नहीं होती
अगर होता ही यही  खेले रिवाज दुनिया का तो तबायफो की दुनिया यू वीरान उनकी गलियां यू बदनाम नही होती

अपनी आयाशियो को मजबूरी का नाम देने वाले
हम तेरी इस मजबूरी पर मलाल क्या करें
तू था मेरी पसंद टूटा है दिल तो अब बवाल क्या करूँ

निगाहें फेर लू तुमसे बेरुखी दिखाकर
की निगाहें फेर लू तुमसे बेरुखी दिखाकर ये जरूरी है क्या
तुम बेवफा हो जानते हैं ये दुनिया को बताना जरूरी है क्या
जिन रास्तो में अपनों ने गैरो का हाथ थाम लिया
मेरा भी उसी राह पर चलना जरूरी है क्या
जो रिश्ते गैरो की वजह से दर्द दे रहे हों
मेरा भी उसी रिस्तो में उलझे रहना जरूरी है क्या

जब खुद ही गिर कर खुद ही सम्भलना है ,
की जब खुद ही गिर कर खुद ही सम्भलना है तो आदत के नाम पर किसी का हाथ थाम कर जरूरी है क्या

तेरे कागज की मैं कलम बन जाऊं
तेरी बेवफाई की मैं सारी दास्ता लिख आऊ
मेरे हिस्से में आये दर्द को तेरे आँशुओ के हक में कर आउ
खुदा देदे मोहलत एक दफा और इश्क की
तुझे मोहब्बत में करके मसरूफ बेवफाई का किरदार निभाउं मैं 

महसूस करेगा तू भी धोखे के जाल में फंसे हुए दिल के दर्द को
पर सोच क्या होगा तेरा
जब तेरे ही दर्द में मुश्कुराऊ और तुझे रोता हुआ छोड़कर किसी और के बाहों में सो जाऊ मैं
Sad hindi poetry by Divya Singh

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