romantic poetry in hindi | तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या - All Shayari-Hindi poems,Love shayari,Hindi Quotes,shayari status

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Saturday, November 20, 2021

romantic poetry in hindi | तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या

romantic poetry in hindi

romantic poetry in hindi
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 अगर बुरा ना माने कुछ पल खाब तेरा हो जाऊँ क्या ,

अगर बुरा ना माने कुछ पल मैं भी खाब तेरा हो जाऊँ क्या , तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या

तेरी आंखे ढण्डी झील सी हैं
कुछ रुकी रुकी कुछ गहरी सीं
वीरान किसी के इंतजार में जहां शांति है ढहरी सी
मैं आकर बैठु पास तेरे तुझमे कहीं खो जाऊ क्या
तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या

तेरा साथ लगे कि जैसे गर्मी में कोई ढण्डी छाया
जैसे अशोक के साये में पाए आराम थकी काया
तू कहे अगर तेरे में चांद में दाग तेरे हो जाऊं क्या
तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या

जैसे सर्दी की माह में भोर में धूप का टुकड़ा तन पर पड़ता हो
और बर्फीली सी पवनों के उस चुभन को पल में हरता हो
तू उस केसरीया सूरज सी
मैं ताप तेरा हो जाऊं क्या
तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या

तू कोई कहानी है या हकीकत , या जोई सुंदर सपना है
मैं एक शायर बदनाम तू शायद मेरी कोई कल्पना है
तुझे आकर गले लगा लू मैं
तेरे अथरों को छू जाऊँ क्या
तू शीतल सरिता गंगा सी मैं घाट तेरा हो जाऊं क्या
Poetry by Sachin sharma

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