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Wednesday, September 8, 2021

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Short hindi poems कविता

 

 नमक चीनी के अंदाजों में गुजरने वाली है जिंदगी ...

 नमक चीनी के अंदाजों में गुजरने वाली है जिंदगी पर तुम चाहो तो इससे मुझे बचा सकते हो थोड़ा कम ज्यादा जो जाए अगर तो क्या खा सकते हो 

गुस्से में भी मुस्कुराओ रूठो खुद पर मुझे मनाओ
हाँ थोड़ा अजिंब है लेकिन क्या ऐसा प्यार जता सकते हो
मुझे आदत है बेवजह नाराज हो जाने की
क्या तुम बेवजह मना सकते हो 
Short hindi poems



और कागज कलम की आगोज में ही गुजर जाते है कई बार राते मेरी पर नींदों के साथ मेरा रिस्ता गहेरा है
तो क्या तुम मेरी ख्वाबो की बस्ती पर और सजा सकते हो
आलार्म बन्द कर मेरी नींदे बढ़ा सकते हो
और सुना है सुबह की पहली  किरणों के साथ जगा करना पड़ेगा मुझको 

चाय नास्ता और बर्तन बहोत कुछ करना पड़ेगा मुझको
तुम मुझपर थोड़ा तरस तो खा सकते हो पर क्या कभी कभी काम मे भी हाथ बटा सकते हो
और जाने अनजाने में शरारतो के बहाने में हो जाती है कई बार गलतिया मुझसे पर तुम चाहो तो इन्हें छिपा सकते हो 

कई बार मेरी गलतियों का इल्जाम खुद पर लगा सकते हो
और ना चांद तांरो की ख्वाहिश मुझे और ना ही चाहिए मुझे कोई हिंरो के हार 

चॉकलेट टैडी के नाम ही मुझे अच्छे लगते है तो क्या है ऐसा जिससे तुम जूझे खुस करा सकते हो
डोसा पसन्द है मुझे बहोत तुम वो खिला सकते हो
और डिडियलजी देखी मैने ना ही कुछ कुछ होता है
हूँ वीर जारा की दीवानी मैं तो सोचती हूँ 

क्या इक पायल के सहारे जिंदगी तुम भी बिता सकते हो
हाँ शायद ये मुमकिन नहीं पर क्या तुम वीर की तरह मुझे चाह सकते हो
और हाँ जानती हूँ मै आसान नहीं होता ये इश्क कभी दरिया है ये आग का तो क्या अपनी बन कभी इसे पार कर आ सकते हो


इस ख़ामोश बड़े शहर को अब खामोश हि रहने दो
मैं दफन हो चुका हूँ दीवारों में मुझे कैद बस होने दो कही उठ गया तो बचे हुए रिस्ते भी मैं खो दूंगा गुनेहगार हूँ ना किसी का गुनहगार ही रहने दो

ये जमाने का कैसा दस्तूर है जो तेरा है तो वो फिर क्यों तुझसे दूर है
तूने आवाज न दी शायद रुकने की उसको वर्ना तू तो खामोश है पर हवाओ में कैसा सोर है

मैं पूछता हूँ इश्क से क्या इश्क कभी हुआ तुझे
मैं पूछता हूँ इश्क से क्या इश्क कभी हुआ तुझे मैं पूछता हर रात से क्या वो ख्वाब भी मिला तुझे
मैं पूछता हूँ इन हवाओ से क्या उसने कभी छुआ तुझे और मैं पूछता हर शक्ल से हूँ क्या मुझसा कोई मिला तुझे

ये किसकी गुनाह की सजा ले रहे हो तुम
जो नही हो वो क्यू दिख रहे हो तुम जाना है तो चले जाओ बिना कहे
की जाना है तो चले जाओ बिना कहे ये क्यू मर मर के रुक रहे हो तुम

झगड़ा मुझसे करके सबसे बाते कर रही हो ...
झगड़ा मुझसे करके सबसे बाते कर रही हो अरे सच सच बताओ ना ये इश्क कर रही हो मजाक कर रही हो

चेहरा देखकर इंसान का सूरत पे मरते है आंखों में हवस और बात प्यार की करते है
बांते सीरत की करके जिस्मो से सुरु होती है ये तो आजकल की मोहब्बत है जनाब कमरों में में पूरी होती है

जिसकी बांहो से लिपट कर सुकून मिल जाये तुझे वो इंसान बनना चाहता हूँ सुन ना मेरी जान मैं तेरी जान बनना चाहता हूँ

मैं कान्हा हूँ अपने घर का मेरी राधा बम पाओगी क्या माना कि तुम्हे वन पीस पहनने का शौक है

जिनके कुछ आँसुओ पे मेरी दुनिया उजड़ती थी
की जिनके कुछ आँशुओ पे मेरी दुनिया उजड़ती थी आज उनकी सिसकिया भी अब असर नही करती शायद कुछ बे परवाह हो गया हूँ मैं या वो नजर अब घर करती 

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कास कोई तो ऐसा हो जो सिर्फ मेरा हो ...
कास कोई तो ऐसा हो जो सिर्फ मेरा हो ना वो चाँद जैसा ना हो ताँरो जैसा 

उसके जैसी हो जाऊं मैं और वो हो जाए मेरे जैसा
ख़यालो में मेरे खोता हो सोचकर मुझे कुछ होता हो
मेरे नाम से उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हो सावल करो दिल और आंखे जवाब दी जाती हो 

जाते वक्त पलट कर वो भी मुझे देखता हो
सरारत भारी निगाहों से रूह को मेरी छेड़ता हो और
महज मेरा नाम सुनकर ही वो महक जाता हो
जितना उसको चाहती हूँ मैं कास वो भी मुझे उतना चाहता हो 

New short hindi poems 


बांतों में मेरी तेरी बात अब भी बाकी है बिगड़ा नही है जिंदगी का गीत साज अब भी बाकी है
टूटा नही है साथ का सपना वो खूब सूरत रात अब भी बाकी है सुनते हैं जिक्र तेरा दूसरों से पर मिलन की आस अब भी बाकी है 


मंजिल नही है पर निशान बाकी है बिछड़े हुए अरसा हो गया दिल मे एहसास अब भी बाकी है खो दिया है खुद को पर तुझे पाने की प्यास बाकी है
मिट गई है रूह तेरी बेवफाई से फिर भी वफ़ा पर विस्वास बाकी है 


कितना भी समझाले खुद को की भूल गए हैं तुझको पर अब भी मुझमें तू ही तू बाकी है तू ही बाकी हैं
माना करती होगी मोहब्बत वो तुझसे पर तड़पाना उसे मेरी इक गुमनाम रिस्ते में रख कर
फिर बतलाना कितनी उसकी मोहब्बत बाकी है
फिर से किस्मत आजमाना बाकी है तेरे ही शहर में घर बसाना बाकी है मिला था दर्द जिस शहर में जहाँ दिल टूटा था 

मिला था दर्द जिस शहर में उसी से अब दिल लगाना बाकी है
पर इन सब जजबातो के बाद खुद्दारी अब भी बाकी है गिरा कर खुद को तेरे प्यार में फिर से उठाना बाकी है
तेरा वापस आना और मेरा ना पलट कर देखना तो बाकी है

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