Maa par shayari & Mothers Day shayari माँ के ऊपर शायरी Mother quotes Love - All Shayari-Hindi poems,Love shayari,Hindi Quotes,shayari status

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Thursday, September 9, 2021

Maa par shayari & Mothers Day shayari माँ के ऊपर शायरी Mother quotes Love

New Maa Par Shayari 

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     लिख के गजल तेरे मेरे किस्से पे...

लिख के गजल तेरे मेरे किस्से पे मैं तेरे यहसास की मदहोसी में  झूम लूंगा और तेरा कर्ज मैं मर कर न उतार पाऊं बस जहाँ पड़े होंगे कदम माँ
मैं वो जमीन चुम लूंगा

लोग तोड़ जाते है दिल एक बहाने में
जिसे एक माँ को नौ महीने लगे थे बनाने में ।

 

 की तुम मेरे दिल की धड़कन

तुम मेरे दिल की धड़कन तो माँ मेरी जान है
और कैसे छोड़ू मैं मेरी माँ को
तुम मेरी दुनिया तो माँ मेरी जहांन है

की मोहब्बत की गली में जा रहे हो
लौट आओ बिखर जाओगे ।।
कभी मौका मिले तो माँ के गोद मे सो जाना
खुदा कसम निखर जाओगे

ये चमक धमक ऐस आराम सब है शहर में
पर मैं गांव का कंकड़ हूं शहर में घुल नही पाता हूं
मैं भी चाहता तो रह जाता मोहब्बत के घर मे
पर क्या करूँ यारो मैं अपनी माँ का चेहरा भूल नही पाता हूँ

 

Maa par shayari

मेरे बुरे वक्त को देख मेरे दोस्तों ने भी साथ छोड़ दिया
और वो मेरी माँ की दुआ है
 जिसने बुरे वक्त का भी रुख मोड़ दिया


लिख के गजल तेरे मेरे किस्से पे...
लिख के गजल तेरे मेरे किस्से पे मैं तेरे यहसास की मदहोसी में  झूम लूंगा और तेरा कर्ज मैं मर कर न उतार पाऊं बस जहाँ पड़े होंगे कदम माँ
मैं वो जमीन चुम लूंगा 

 

इस खाने में वो स्वाद नही जो मेरी मां बनाती है
और आंधी तूफान बहोत आये मुझे डराने के लिए
पर उस आँचल को छू नही पाए जिसमे मेरी मां सुलाती है ।।

 

इधर मेरी खुशियां मुझसे दूर जा रही है
उधर मौत मुझे गले लगा रही है ।।
और एक आखिरी सांस बचाकर रखी है हमने
मेरी माँ मुझसे मिलने गांव से आ रही है

 

 यू तो बचपन से मेरी माँ ने मुझे हँसना सिखाया था 
पर रोना ऐ जिंदगी तूने मुझे शिखाया है
मेरी माँ के जाने के बाद ऐ जिंदगी तूने अपना असली रंग दिखाया है


मेरे बचपन से ही मेरी हंसी मेरी खुसी सबसे प्यारी थी मेरी माँ को
ये सब छीन कर भी तूने मुझे जीना शिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है


जिस लड़की को बिना डरे उसकी माँ ने जिना शिखाया था
गलत के खिलाफ आवाज उठाना उसकी माँ ने सिखाया था
आज उसके गलत  देखते हुए भी चुप रहना तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है

बचपन मे मेरी माँ मेरी एक आवाज से मेरी हर ख्वाहिश पूरी कर जाती थी
आज अपने ख्वाहिशो की दबाना मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद मुझे तूने अपना असली रंग दिखाया है


Hindi Me maa par shayari

 

यू तो बिना खाये सोने नही देती थी मेरी माँ मुझे
आज बिना खाये मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने मुझे अपना असली रंग दिखाया है

रिस्तो की कीमत बचपन से ही सिखाई थी मेरी माँ ने मुझे
पर उन रिस्तो को छोटी उमर में निभाना तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है


अक्सर जब मैं अपने माँ से गुस्सा हो जाया करती थी तो मेरी माँ ने मुझे बढे प्यार से मनाया करती थी
आज जब मैं गुस्सा हो जाती हूं तो खुद की ही कोस जाती हूं
कमरे में जाकर रोती हूं और खुद को ही चुप कराती हूं
ये हुनर भी मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद मुझे तूने अपना असली रंग दिखाया है

अक्सर मैं जब काम से थक कर घर आती थी
तो मेरी माँ मेरे लिए खाना बनाती थी
और मैं उस खाने में भी नखरे दिखाती थी
आज जब मैं थक कर आती हूं तो खुद ही खाना बनाती हूं
वो जला भी होतो चुप चाप खाती हूं ये हुनर भी मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने मुझे अपना असली रंग दिखाया है

हाँ ये सच है की मेरी माँ ने मुझे बहोत कुछ सिखाया था
पर मुझे मेरी जिंदगी का असली मलतब माँ के जाने के बाद समझ आया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है


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याद जब भी आती है माँ तेरी
याद जब भी आती है माँ तेरी...
मैं बस चाँद को देख लेता हूं
तू मुझे दिखे या ना दिखे मैं तुझे देख लेता हूं


मेहेशे नाकाम इश्क़ नही
मेहेशे नाकाम इश्क़ नही ...
मेरी बर्बादियों के मंजर है बहोत से
माँ रो देगी मुझे यू देख इसलिए मैं घर नही जाता
माँ रो देगी मुझे यू देख बस यही सोच मैं घर नही जाता
और शायर युही नही बना मै अगर वो दामन ना छोड़ते तो मैं निखर नही पाता

कैसे हार मान जाँऊ मैं उन तकलीफो से
मेरी तरक्की के आस में
की कैसे हार मान जाऊँ मैं उन तकलीफो से
तरक्की के आस में मेरी माँ आज भी कब से आस लगा बैठी है

 

तुम क्या जानो की माँ क्या होती है
माँ हमारी जमीं और आसमाँ होती है ..
जब जरूरत पड़ती है हमें बून्द की
तो अपने छाती से वो हमें समुन्दर पिलाती है
और जरूरत पर वो खुद भूखे सो जाती है

माँ पर शायरी

 

तुम क्या जानो की माँ क्या होती है
यही माँ कभी तुम्हे सर्वंन बनाती है
यही माँ कभी तुम्हे मोहम्मन बनाती है
लेकिन माँ खुद माँ ही रह जाती है
तुम क्या जानो की माँ क्या होती है


माँ पर शायरी माँ ना होती तो ये जमीं आसमाँ ना होता
अगर माँ ना होती तो ये जमीन और आसमान ना होता
माँ ना होती तो ये सारा जहांन ना होता

माँ नाम की गजब तलब लगी थी उसे भी लगी कई जबरदस्त प्यास
उठायी कलम लिख डाली दस्ता
लगता था माँ मेरी बैठी थी उदाश
मैने देखी है इस जालिम दुनिया को दुख की घड़ी में मांगती है मन्नत
अरे माँ की सेवा कर ले मेरे दोस्त तुम्हे जीते जी मिल जाएगी जन्नत

जब जब मैं इस जालिम दुनिया को देखता हूं ...
मेरा भी मन करता है बन जाऊं धांशू
पर माँ तेरा आँचल वो याद आता है
बस तूने ही तो पोछे थे मेरे आँशु


माँ परदेश में नौकरी करता हूं ..
माँ परदेश में नौकरी करता हूं याद आती है तेरी
पास होकर भी दूर हूं तुझसे यही है
यही तो मजबूरी है मेरी

मेरी माँ खुदा करें आंखे तेरी नम ना हो ...
मेरी माँ खुदा करें आंखे तेरी कभी हम ना हो जिस राह पे तू चले उस राह पे कभी कोई गम ना हो
आये दुख की घड़ी जिस दिन तेरे पे ....
खुदा करे उस दिन इस दुनिया मे हम ना हो


Best image  Maa par shayari  


अजब गजब की दुनिया देखी और देखे दुनिया वाले ...
मेरे राहो में तो आँगारे बोये थे
पर मेरी माँ के आशीर्वाद से ना पड़ सके मेरे पाँव में छाले
साहब जिसकी माँ नही होती ...
साहब जिसकी माँ नही होती उससे पूछो क्या होती है माँ की ममता

 

आज तूने मुझे इस काबिल बनाया वर्ना मेरे में कहॉ थी इतनी क्षमता
मेरे बुरे वक्त को देख मेरे दोस्तों ने भी साथ छोड़ दिया
और वो मेरी माँ की दुआ है
 जिसने बुरे वक्त का भी रुख मोड़ दिया

जो खुदा है उसे खुदा कहता हूं
वो मेरे घर मे रहता है उसे माँ कहता हूं
जो कपड़ा मुझे छाँव देता है मुझे धूप से
उसी आँचल को मैं आसमाँ कहता हूं

 

Maa ke upar shayari


तेरा गुरुर उन्ही बांतो से है जो अक्षर कभी पढ़ना सिखाये
तेरी सेहत उसी पोषन से है जो फल फूल कभी उसने खिलाये
यू तो माँ का अर्ज हर भाषा मे समान है लेकिन माँ का असली
 भावार्थ किसी उपन्यास में नही आज जो तू पैरो पर अपने दीवाने सा और करे उसका अपमान है तू करे उसकी त्याग का परमान ये उसकी किस्मत में नही
का उस मासूम अनाथ से मिल तू उसकी दिल मे माँ की तस्वीर पायेगा

और जब तू अपनी माँ की आखिरी शब्द सुनेगा मान या ना मान आँशु तेरे भी आएंगे
पैरो से जमीन तेरे भी निकल जाएंगे
और जब यहशास तू इसका पाएगा कहां जाएगा

 की तबाहि है तो तबाही ही रहने दे
ताबहि है तो तबाही  ही रहने दें तू सब कुछ छीन ले मुझसे फिर भी तेरी औकात बता दूंगा
बस मेरी कलम में स्याही रहने दे


किसी ने राम लिखा तो किसी ने रहमान लिखा ।।
सब कोई अपने मन का ज्ञान लिखा
मैं सोच में पड़ गया यारो की मैं क्या लिखूं
आंख बंद करके कागज पर कलम घुमाया ।।
तो मेरी कलम ने मेरी माँ का नाम लिखा

ना पूजा करता हूं ना नमाज पड़ता हूं ।।
ना पूजा करता हूं ना नमाज पढ़ता हूं ना किसी सजदे में सर को झुकाया है
और ना ज्ञान है मुझे कुरान का , ना गीता को माथे से लगाया है
बस पूजता हूं उस देवी को जिसने जिसने मुझे धरती पर लाया है

 

Mothers day shayari


झुरिया और बर्फीली बाल यार कहीँ देरी ना हो जाये
की झुरिया और बर्फीली बाल यार कही देरी ना हो जाये जिसने चलना सिखाया था उसकी लाठी बनने में यार कहीं देरी ना हो जाये


आंखे धुंधली देखती है उसकी जिसने दुनिया दिखाई थी
चश्मा बनवा लाता हूं ना, यार कहीं देरी ना हो जाये
रख लेता हूँ ध्यान माँ बाप का हारी बीमारी में
हाँ यार दिला लाता हूं कहीं देरी ना हो जाये
की यार कहीँ देरी ना हो जाये ,

 

शायरी maa par shayari


की मैं डरा नही ।।
सामने मौत खड़ी थी ,और मैं क्यों डरता मौत से ।।
मौत से पहले मेरी माँ खड़ी थी
मेरी माँ भी घबराई नही , पर क्यू घबराती मेरी माँ
मेरी माँ मेरे पापा के साथ खड़ी थी

कोई जलती गजल या कहानी नही ।।
कोई जलती गजल या कहानी नही अपने जजबात लाया हूं
उसके जाने के बाद जो उसे कह ना सका
ओ सारी बात लाया हूं
और उतरा हूं जंग के मैदान मे जीत मेरी मुकर्रर है मेरे दोस्त क्यूंकि की मैं अपने माँ के पैरों की धूल अपने साथ लाया हूं

माँ के पल्लू में नींद बड़ी अच्छी आती है ।।
मेरी दुनिया उसी में सिमट जाती है ।।
और मैं जीत लेता हूं उस एक बड़ी सच्चाई को भी
मौत भी पल्लू में झाँक कर वापस चली जाती है ।।

 

Mothers day shayari

खुद के सपने हमारे आंखों में देखा करते है
हमे गाड़ी देकर खुद पैदल घुमा करते है
और कैसे छोड़ दूं उन्हें तेरे एक कहने पर
वो पापा है जो माँ से भी ज्यादा मोहब्बत किया करते है

 

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